UP Roadways Outsource News

September 16, 2026

Shravan Kumar

UP Roadways Outsource News: यूपी रोडवेज कर्मियों की बल्ले-बल्ले! अब आउटसोर्स का झंझट खत्म, सीधे मिलेगी संविदा नौकरी, देखें नया नियम

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UP Roadways Outsource News: उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम में लंबे समय से आउटसोर्स के जरिए काम कर रहे परिचालकों (कंडक्टरों) के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। अब इन परिचालकों को एजेंसी के माध्यम से नहीं, बल्कि सीधे संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर तैनाती मिलेगी। इतना ही नहीं, इनके मानदेय यानी सैलरी में भी बढ़ोतरी की गई है। यह फैसला हजारों परिचालकों की जिंदगी में सीधा बदलाव लाने वाला है, क्योंकि अब तक इन्हें प्राइवेट एजेंसियों के भरोसे रहना पड़ता था, जहां न तो नौकरी की पक्की गारंटी थी और न ही मानदेय ठीक-ठाक था।

पूरा मामला क्या है यहाँ जाने

गोरखपुर से मिली जानकारी के मुताबिक, परिवहन निगम के रीजनल ऑफिस को अब यह अधिकार दे दिया गया है कि वह परिचालकों को सीधे कॉन्ट्रैक्ट लेटर के आधार पर नियुक्त कर सके। इससे पहले यह पूरा काम आउटसोर्सिंग एजेंसियों के जरिए होता था। इस बदलाव को लागू करने के लिए लखनऊ स्थित निगम मुख्यालय ने बाकायदा एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी एसओपी जारी की है, जिसमें पूरी प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया है।

सबसे राहत की बात यह है कि पहले चरण में उन्हीं परिचालकों को मौका मिलेगा जो अभी आउटसोर्स के जरिए निगम में काम कर रहे हैं और सीधे कॉन्ट्रैक्ट पर आना चाहते हैं। यानी पुराने और अनुभवी कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी, नए सिरे से भर्ती की झंझट नहीं होगी।

सरकार के आदेश पर लागू हो रही है यह व्यवस्था

यह पूरा बदलाव यूं ही नहीं हो रहा, बल्कि इसके पीछे उत्तर प्रदेश सरकार के दो अलग-अलग आदेश हैं, जो अगस्त 2026 में जारी किए गए थे — एक 21 अगस्त को और दूसरा 25 अगस्त को। इन्हीं आदेशों के आधार पर अब यह नई व्यवस्था अमल में लाई जा रही है।

एक जरूरी शर्त यह भी रखी गई है कि जो भी परिचालक इस मौके का फायदा उठाना चाहते हैं, उन्हें सेवा योजन पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। बिना पोर्टल पर पंजीकरण के किसी को भी संविदा पर नहीं रखा जाएगा।

किन परिचालकों को नहीं मिलेगा फायदा

हर किसी को इस नई व्यवस्था का लाभ नहीं मिलेगा। एसओपी में साफ लिखा है कि जिन परिचालकों को पहले किसी वजह से एजेंसी को वापस भेजा जा चुका है — चाहे वह कदाचार की वजह से हो, भ्रष्टाचार के आरोप में हो, या किसी और कारण से — उन्हें सीधे कॉन्ट्रैक्ट पर नहीं लिया जाएगा। यानी यह मौका सिर्फ उन्हीं परिचालकों के लिए है जिनका रिकॉर्ड साफ-सुथरा रहा है और जो तय शर्तों को पूरा करते हैं।

जिनका कॉन्ट्रैक्ट अक्टूबर में खत्म हो रहा है, उनके लिए भी अलग निर्देश

निगम ने उन सेवाप्रदाता एजेंसियों के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं जिनका मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट 31 अक्टूबर 2026 को खत्म होने वाला है। इन एजेंसियों के जरिए जो परिचालक अभी काम कर रहे हैं, उनके लिए 1 नवंबर 2026 से आगे की प्रक्रिया क्या होगी, यह भी एसओपी में तय कर दिया गया है। मुख्यालय ने सभी क्षेत्रीय प्रबंधकों और सहायक क्षेत्रीय प्रबंधकों से कहा है कि वे इन निर्देशों का पालन सख्ती से सुनिश्चित करें।

गोरखपुर में ही 650 परिचालकों को मिलेगा फायदा

अगर सिर्फ गोरखपुर परिक्षेत्र की बात करें, तो यहां करीब 650 परिचालक ऐसे हैं जो अभी आउटसोर्स के जरिए काम कर रहे हैं। इस नए नियम के लागू होने से इन सभी को सीधे कॉन्ट्रैक्ट पर आने का मौका मिलेगा। क्षेत्रीय प्रबंधक लव कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यालय से निर्देश मिल चुके हैं और इन्हें लागू कराने का काम शुरू कर दिया जाएगा।

यूपी रोडवेज इंप्लाइज यूनियन के क्षेत्रीय अध्यक्ष दिनेश मणि मिश्र ने भी सरकार के इस कदम की सराहना की है और इसे परिचालकों के हित में उठाया गया अच्छा फैसला बताया है।

कितना बढ़ेगा मानदेय, यहां समझें

इस नई व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि संविदा पर आते ही परिचालकों की प्रति किलोमीटर कमाई भी बढ़ जाएगी। अभी तक आउटसोर्स परिचालकों को जो मानदेय मिलता था, उसमें अच्छा-खासा इजाफा किया गया है।

व्यवस्थाप्रति किलोमीटर मानदेय
पुरानी व्यवस्था (आउटसोर्स)1.75 रुपये प्रति किमी
नई व्यवस्था (संविदा)2.16 रुपये प्रति किमी

यानी जैसे ही किसी परिचालक की तैनाती आउटसोर्स से संविदा में बदलती है, उसकी कमाई में सीधा फायदा हो जाएगा।

किन शर्तों पर मिलेगा सीधा कॉन्ट्रैक्ट

परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने इस बारे में साफ किया है कि जो परिचालक अभी आउटसोर्स के जरिए काम कर रहे हैं और जिन्हें किसी कदाचार, भ्रष्टाचार या अन्य वजह से एजेंसी को वापस नहीं किया गया है, उन्हें सीधे कॉन्ट्रैक्ट पर रखा जा सकेगा।

हालांकि इसके लिए एक शर्त यह भी है कि उन्हें एक तय सिक्योरिटी राशि जमा करानी होगी। साथ ही यह भी ध्यान रखने वाली बात है कि आउटसोर्स के दौरान की गई पुरानी सेवा को किसी तरह का अतिरिक्त लाभ (जैसे सीनियरिटी या अनुभव का फायदा) देने में नहीं गिना जाएगा। यानी संविदा पर नई शुरुआत मानी जाएगी, भले ही व्यक्ति सालों से आउटसोर्स पर काम कर रहा हो।

परिचालकों के लिए इसका क्या मतलब है

इस बदलाव को अगर आसान भाषा में समझें, तो अब तक परिचालकों की नौकरी एजेंसी के भरोसे चलती थी। एजेंसी बदलने या कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने पर उनकी नौकरी पर भी असर पड़ता था। लेकिन अब सीधे निगम से जुड़ने का मौका मिलने से उनकी नौकरी में थोड़ी स्थिरता आएगी, और साथ ही हर महीने मिलने वाली रकम में भी इजाफा होगा। जिन परिचालकों का रिकॉर्ड साफ है, उनके लिए यह मौका किसी बड़ी राहत से कम नहीं है।

आने वाले दिनों में जैसे-जैसे एसओपी को अलग-अलग क्षेत्रों में लागू किया जाएगा, ज्यादा से ज्यादा परिचालकों को इस नई व्यवस्था का फायदा मिलना शुरू हो जाएगा।

Shravan Kumar, Senior Content Writer at Jan Seva Drishti

About Shravan Kumar

Shravan Kumar is the Senior Content Writer and Social Media Manager at Janseva Drishti, bringing over six years of expertise in digital content creation. He is dedicated to delivering accurate and timely updates on government schemes, recruitment news, competitive exams, internships, and key educational announcements to keep readers informed.

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