UP Teacher News: उत्तर प्रदेश की चर्चित 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती का विवाद अभी भी सुलझा नहीं है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर सुनवाई हुई, जहां चुने गए अभ्यर्थियों की तरफ से पेश वकीलों ने अपनी दलीलें रखीं। सबसे चिंता की बात यह सामने आई कि अगर लखनऊ हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रहता है, तो पिछले 6 साल से नौकरी कर रहे करीब 10 हजार शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो भी सही होगा, अंतिम फैसला उसी आधार पर लिया जाएगा।
आरक्षण को लेकर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान चुने गए अभ्यर्थियों के वकील ने एक बड़ा सवाल उठाया। उनका कहना था कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को पहले ही TET परीक्षा में आरक्षण मिल चुका था, और अब वही उम्मीदवार सहायक अध्यापक परीक्षा में भी आरक्षण का फायदा ले रहे हैं, यानी एक ही भर्ती के लिए दो बार आरक्षण का लाभ मिल रहा है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील पर कहा कि TET कोई भर्ती परीक्षा नहीं, बल्कि सिर्फ एक पात्रता परीक्षा है, इसलिए इसे दो बार आरक्षण लेना नहीं कहा जा सकता।
वकील ने यह भी बताया कि अगर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो सिर्फ 817 अनारक्षित अभ्यर्थियों को ही नौकरी मिल पाएगी, जबकि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों की संख्या इससे कहीं ज्यादा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जो भी उम्मीदवार चयनित होने का अधिकार रखते हैं, उन्हें भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा जरूर बनना चाहिए।
सामान्य वर्ग के माइग्रेशन पर भी उठे सवाल
अभ्यर्थियों की तरफ से पेश हुईं वकील, जिनका नाम शोभा गुप्ता है, उन्होंने भी एक अहम सवाल उठाया। उनका कहना था कि जिन उम्मीदवारों ने भर्ती के दौरान आरक्षण का लाभ लिया, वे बाद में ज्यादा नंबर आने पर सामान्य वर्ग में कैसे माइग्रेट कर सकते हैं। उनके मुताबिक जिसने एक बार आरक्षण की छूट का फायदा उठाया, वह सामान्य वर्ग में जाने का दावा नहीं कर सकता। इस दलील के समर्थन में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ही कुछ पुराने फैसलों का हवाला भी दिया।
अब अगली सुनवाई में उन अभ्यर्थियों के वकीलों की बात सुनी जाएगी, जो आरक्षण से जुड़े इस विवाद से प्रभावित हुए हैं। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।
आखिर शुरू से क्या है पूरा मामला समझें
यह पूरा विवाद 2018 से चला आ रहा है। नीचे टेबल में मामले की पूरी टाइमलाइन दी गई है, ताकि पूरी घटना को आसानी से समझा जा सके।
| तारीख | घटना |
|---|---|
| 5 दिसंबर 2018 | 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती का नोटिफिकेशन जारी हुआ |
| 6 जनवरी 2019 | लिखित परीक्षा आयोजित हुई, जिसमें 4 लाख से ज्यादा उम्मीदवार शामिल हुए |
| 12 मई 2020 | रिजल्ट जारी हुआ, 1.47 लाख उम्मीदवार पास हुए (सामान्य कटऑफ 67.11%, OBC कटऑफ 66.73%) |
| इसके बाद | आरोप लगा कि OBC और SC कोटे की सीटों पर सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को नियुक्ति दी गई |
| हाईकोर्ट का फैसला | पुरानी मेरिट लिस्ट रद्द करके नई लिस्ट जारी करने का आदेश, सरकार को 3 महीने का समय दिया गया |
| 2020 | मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, काउंसलिंग पर रोक लगी |
| 2020 (सुप्रीम कोर्ट का आदेश) | 69,000 में से 37,339 पद होल्ड, बाकी 31,661 पदों पर भर्ती जारी रखने का आदेश |
आरक्षण में गड़बड़ी का आरोप !
भर्ती पूरी होने के बाद आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि OBC और SC कोटे में आने वाली हजारों सीटों पर सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को नियुक्ति दे दी गई। उनका कहना था कि इस वजह से योग्य होने के बावजूद उन्हें नौकरी से वंचित रहना पड़ा। इसके साथ ही कटऑफ को घटाकर 45 प्रतिशत करने की मांग भी उठाई गई थी। यही पूरा विवाद बाद में हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
अब आगे क्या होगा
फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, और दोनों पक्षों की दलीलें अलग-अलग सुनवाई में सुनी जा रही हैं। 22 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में आरक्षण से प्रभावित उम्मीदवारों के वकीलों का पक्ष सुना जाएगा। इस पूरे मामले का अंतिम फैसला हजारों शिक्षकों की नौकरी और नई नियुक्तियों, दोनों पर सीधा असर डालने वाला है, इसलिए प्रभावित पक्ष और आम जनता, दोनों की निगाहें अब अगली सुनवाई पर टिकी हैं।




